ऑनलाइन ऑर्डर किए Veg Momos , डिलीवर कर दिए नॉनवेज , अब देना होगा 26 हजार का जुर्माना
गुरुग्राम की रहने वाली चिंकी ने रात के भोजन के लिए स्विगी ऐप के जरिए सेक्टर-31 स्थित 'स्टीम्ड एंड फ्राइड' रेस्टोरेंट से वेज अफगानी मोमोज और चिली गार्लिक नूडल्स मंगवाए। 649 रुपये का यह ऑर्डर 45 मिनट में डिलीवर होने का वादा किया गया था।

Veg Momos : ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी (Swiggy) और एक रेस्टोरेंट को सेवा में घोर लापरवाही के लिए उपभोक्ता अदालत में कड़ा सबक मिला है। मामला वेज (शाकाहारी) ऑर्डर के बदले नॉनवेज (मांसाहारी) आइटम भेजने और फिर ग्राहक की शिकायत को नजरअंदाज करने का है। कोर्ट ने इस चूक को ‘सेवा में कमी’ मानते हुए, ग्राहक को ऑर्डर की कीमत के साथ-साथ मानसिक पीड़ा और केस खर्च के लिए भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह पूरा मामला पिछले साल 25 जुलाई का है। गुरुग्राम की रहने वाली चिंकी ने रात के भोजन के लिए स्विगी ऐप के जरिए सेक्टर-31 स्थित ‘स्टीम्ड एंड फ्राइड’ रेस्टोरेंट से वेज अफगानी मोमोज और चिली गार्लिक नूडल्स मंगवाए। 649 रुपये का यह ऑर्डर 45 मिनट में डिलीवर होने का वादा किया गया था।
लेकिन, डिलीवरी में 1 घंटे 45 मिनट (कुल 105 मिनट) की असाधारण देरी हुई। देरी का झटका यहीं खत्म नहीं हुआ। जब आखिरकार ऑर्डर आया, तो शाकाहारी भोजन की जगह उसमें नॉनवेज आइटम निकले, जो ग्राहक के लिए एक बड़ी निराशा और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था।
गलत ऑर्डर मिलते ही, चिंकी ने तुरंत स्विगी और रेस्टोरेंट दोनों से संपर्क किया। बार-बार कॉल और ईमेल किए गए, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला। डिलीवरी कंपनी और रेस्टोरेंट की ओर से इस मामले को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया। जब सभी प्रयास विफल हो गए, तो ग्राहक ने 7 अगस्त को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया।
आखिरकार, न्याय के लिए चिंकी को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
इस मामले की सुनवाई के दौरान, स्विगी और रेस्टोरेंट, दोनों में से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके चलते आयोग ने मामले में एकतरफा फैसला सुनाया।
जज खुशविंदर कौर की बेंच ने पाया कि समय पर और सही डिलीवरी सुनिश्चित करना एक बुनियादी सेवा है। गलत सामान भेजना और ग्राहक की शिकायतों पर ध्यान न देना, ‘सेवा में बड़ी कमी’ को दर्शाता है।
कोर्ट का कड़ा आदेश:
पूरी राशि वापसी: शिकायतकर्ता की ओर से भुगतान की गई पूरी राशि ₹649, 9% वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए।
मानसिक मुआवजे: मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 का मुआवजा दिया जाए।
केस खर्च: कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹11,000 का भुगतान किया जाए।
स्विगी और रेस्टोरेंट को यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर ग्राहक को देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को अपनी ‘सेवा में कमी’ के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा, खासकर तब जब वे धार्मिक या व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतते हैं।